भारत के संसद में होने वाला है कुछ बड़ा! भाजपा ने सांसदों को मौजूद रहने के निर्देश

Special session of Parliament: मोदी सरकार ने 18 सितंबर से संसद का विशेष सत्र बुलाया है। 

इस दौरान सरकार कई ऐसे बिल ला सकती है। जिससे लोग चौंक जाए। सरकार के विशेष सत्र बुलाने के बाद भाजपा ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है।



केंद्र की मोदी सरकार अक्सर चौंकाने वाले फैसले लेती रहती है। अभी हाल ही में संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हुआ। लेकिन सरकार ने फिर से 18 सितंबर से संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस दौरान सरकार कई ऐसे बिल ला सकती है। जिससे लोग चौंक जाए। सरकार के विशेस सत्र बुलाने के बाद भाजपा ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर संसद सत्र के दौरान मौजूद रहने का निर्देश दिया है।

बता दें कि सरकार ने संसद सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में IPC के कानूनों में बदलाव करने वाला अहम बिल पेश किया था। इसके अलावा ये भी जानते है कि भाजपा ने किन-किन मौकों पर सांसदों को व्हिप जारी किया है

कुल 4 अहम बिल पेश कर सकती है सरकार

सूत्रों के मुताबिक सरकार इस विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पोस्ट ऑफिस बिल और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले संशोधन बिल पेश करने वाली है। कुल 4 बिल पेश किए जाएंगे, जिनमें चुनाव आयोग वाला विधेयक सबसे अहम है। बता दें कि अगर चुनाव आयोग वाला विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास हो जाएगा तो उसके बाद चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में CJI का दखल खत्म हो जाएगा।

सदन में रहने और सरकार का समर्थन करने का निर्देश

संसद के विशेष सत्र के लिए भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों को उपस्थित रहने का आदेश दिया है। तीन लाइन की व्हिप जारी करते हुए सरकार ने सांसदों से कहा कि सदन में कुछ अति महत्वपूर्ण विधायी कार्य पर चर्चा और उन्हें पारित कराने के लिए उपस्थित रहें। पार्टी की ओर से जारी व्हिप में कहा गया कि सभी सांसद अनिवार्य रूप से सदन में रहें और सरकार के पक्ष का समर्थन करें।

CEC की नियुक्ति में CJI का दखल खत्म करना चाहती है सरकार

इस संशोधन विधेयक के जरिए सरकार चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट का दखल खत्म करना चाहती है। नई व्यवस्था के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति वाले पैनल में चीफ जस्टिस नहीं रहेंगे। चुनाव आयुक्त की नियुक्ति वाले बिल के सेक्शन 7 में कहा गया है कि इसके लिए एक समिति गठित होगी।

इस समिति में पीएम, उनके द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता होंगे। इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि अब चीफ जस्टिस को इस समिति से बाहर रखा जाएगा। इसके अलावा कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री और पीएम मिलकर किसी भी नियुक्ति को मंजूर कर लेंगे।

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